2007년 7월 17일 화요일

एक सवाल

क्या आपने कभी ध्यान से देखा है कि एक कुत्ता या एक डोगी पेशाब करने के वक्त जगह जगह सूंघता है और कयी जगह सूंघने के बाद कोई एक जगह पसंद आने पर कुछ पेशाब की बूँदें उस जगह पर गिराता है और फिर एक नै जगह की तलाश करता है और इसी तरह लगभग एक घंटे मे जाकर वह पेशाब करने की प्रक्रिया पूरी करता है।
सवाल ये है कि "ek kutta peshaab karne ke liye jagah ka chayan karte hue kya kya aadhar apne dimaag mei rakhta hoga। ya peshaab karne ke liye use kaisi jagah pasand aati hogi ya ki jo jagah vh naapasand karata hai to usaka aadhar kya hota hoga."

2007년 6월 24일 일요일

राजनीति का कमीनापन

भारत मैं एक अतिप्रसिद्ध एवम सम्माननीय व्यक्ति को चुनाव से हटाने का सबसे आसान तरीका है कि उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से कुछ ओछी बात कह्दो तो वह अपने आप ही राजनीती कि दलदल से बाहर हो जाएगा और राजनीति बाजों के चमन खिल जायेंगे। कुछ एसा ही ए पी जे अब्दुल कलाम के मामले में हुआ । यद्यपि सारा देश उन्हें दुबारा राष्ट्रपति चुनना चाहता है परंतु हमारे कमीने राजनीति बाजों को यह केसे बर्दाश्त हो सकता था । सो कुछ एसा कह दिया कि वे खुद ही चुनाव से हट गए। राजनीति खुश ।

2007년 6월 9일 토요일

बे कसूर गुर्जर युवक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान फैली हिंसा, आगजनी व अरबों रूपये की सरकारी व निजी सम्पत्ति को पहुंचाया गया नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की धरपकड़ की जा रही है। क्या पुलिस किसी जुर्म के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को सिर्फ तब ही गिरफ्तार करेगी जब उसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलेगा। और अब सारे बडे गुर्जर नेता अन्दर ग्राऊंड हो गए हैं हो गए हैं और जो सांसद या विधायक हैं वो बस पुलिस के खिलाफ अभियान चला रहे हैं कि पुलिस बेकसूर लोगों को खास तौर पर गुर्जर नवयुवकों को परेशान कर रही है।
वाह मेरे शेर गुर्जरो अब गीदड़ बने हो।
मेरा सुझाव- पुलिस को लाठी बंदूक कि बजाये कैमरे अपने साथ रखने चाहिएँ शायद कैमरे कि नज़र से बचना पुलिस के डंडे से बचने से भी ज्यादा मुश्किल होगा।

2007년 5월 30일 수요일

tippanikhabronpar

गुर्जरोंका आन्दोलन आरक्षण एवम वोट बेंक की राजनीती का ही प्रभाव हे जिसके लिए सभी राज्नितिबज दोषी हैं

दूर कि कौड़ी यानी अगले चुनावों में भी हमें जिताओ ।

इस देश में जब सर्कार के जाने का समय आता है तब वह योजनायें बनानी शुरू करती है जैसे कि सरदार मनमोहन सिंह जी ने किसानों के लिए पेंतालिस हजार करोड़ की योजना की घोषणा की है वो भी चार साल के लिए। यांनी कि उनके बाकी हैं सिर्फ दो साल और योजना चार साल की। सरदारजी दो साल की योजना बना लेते जिसे पूरा करने का समय भी तुम्हारे पास था। पर फिर अगले चुनाव में लोग पूछते कि योजना का क्या हुआ। अब तो कह सकते हैं कि योजना चार साल के लिए है इसलिये हमें दो साल और चाहिए सो दुबारा मौका दो तो यह योजना पूरी होगी। यानी दोनों हाथों में लड्डू । वाह सरदारजी मान गए।

2007년 5월 6일 일요일

Sharaab buri cheez hai

एक खबर : सिगरेट व शराब बुरी चीज़ हैं।हमें इसके खिलाफ अभियान चलाना है।- स्वास्थ्य मंत्रालय ।
दूसरी खबर: हमने सिगरेट व शराब से होने वाली आबकारी टेक्स की सालाना आय में लगातार वृद्धि दर्ज़ की है ।- वित्त मंत्रालय।
तीसरी खबर: प्रधान मंत्री कार्यालय किसी मंत्रालय के काम में दखल नहीं देता।-पी एम् ओ।

Tippanikhabronpar

1. Ek khabar-Kahte hain hamare vegyanikon ne space mein ek aur dharti jaisa grah khoja hai, jahan par dharti jaisa mahol hai. Kaha jar aha hai ki kyonki dharti par janta bahut badh gai hai isliye yahan ko logon ko vhan basaya ja sakta hai.
Tippni khabar par:- Haan bhai is dharti ko global warming se satya nash karke ab doosri dharti ko kyon chhorrna, uska bhi satyanash karke chhorenge. Tab tak koi qur dharti mil jayegi. Kuch bhi ho1.
2.Ek khabar:-Aarakshan.
Tippni khabar par:- Raja Manda Vishwa Pratap Singh ho chaahe kanwar Arjun Singh, Raja maharajaon ko bhi gareeb jatiyon ka khayal aa hi jata hai, jinko apne raaj main unhonne khoob sataya. Par ab vo unke sabse bare shubhchintak bane hue hein. Aakhir raja Raj ke bina kaise rah sakta hai, chaahe iske liye unhin ki camcha giri kyon na karni pare jinhe apne raj mein unhonne na chen se jeene dia, na chen se marne dia. Wah ree raajneeti. jaye par ham nahin sudhrenge.

2007년 5월 5일 토요일

2007년 4월 25일 수요일

myblogblogy.blogspot

ek khabar bhartiya sarkaar desh ko dharm jaati ke aadhaar par nahin bantna chahti hai-sardaar manmohan singh ji.
Tippni- lekin jati dharm ke aadhaar par kuchh ko sahuliyaten deti rahegi.(kyonki issssey hamara vote bank majboot hota hai. Aur hum satta mein hi nahin aayenge to desh ko dharm jaati keaadhar par bantne se kaise rokainge. Zara socho yaar.