2007년 6월 24일 일요일
राजनीति का कमीनापन
भारत मैं एक अतिप्रसिद्ध एवम सम्माननीय व्यक्ति को चुनाव से हटाने का सबसे आसान तरीका है कि उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से कुछ ओछी बात कह्दो तो वह अपने आप ही राजनीती कि दलदल से बाहर हो जाएगा और राजनीति बाजों के चमन खिल जायेंगे। कुछ एसा ही ए पी जे अब्दुल कलाम के मामले में हुआ । यद्यपि सारा देश उन्हें दुबारा राष्ट्रपति चुनना चाहता है परंतु हमारे कमीने राजनीति बाजों को यह केसे बर्दाश्त हो सकता था । सो कुछ एसा कह दिया कि वे खुद ही चुनाव से हट गए। राजनीति खुश ।
2007년 6월 9일 토요일
बे कसूर गुर्जर युवक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान फैली हिंसा, आगजनी व अरबों रूपये की सरकारी व निजी सम्पत्ति को पहुंचाया गया नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की धरपकड़ की जा रही है। क्या पुलिस किसी जुर्म के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को सिर्फ तब ही गिरफ्तार करेगी जब उसे सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलेगा। और अब सारे बडे गुर्जर नेता अन्दर ग्राऊंड हो गए हैं हो गए हैं और जो सांसद या विधायक हैं वो बस पुलिस के खिलाफ अभियान चला रहे हैं कि पुलिस बेकसूर लोगों को खास तौर पर गुर्जर नवयुवकों को परेशान कर रही है।
वाह मेरे शेर गुर्जरो अब गीदड़ बने हो।
मेरा सुझाव- पुलिस को लाठी बंदूक कि बजाये कैमरे अपने साथ रखने चाहिएँ शायद कैमरे कि नज़र से बचना पुलिस के डंडे से बचने से भी ज्यादा मुश्किल होगा।
वाह मेरे शेर गुर्जरो अब गीदड़ बने हो।
मेरा सुझाव- पुलिस को लाठी बंदूक कि बजाये कैमरे अपने साथ रखने चाहिएँ शायद कैमरे कि नज़र से बचना पुलिस के डंडे से बचने से भी ज्यादा मुश्किल होगा।
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